मूर्ति विसर्जन
आज शहरीकरण के दौर में जहाँ नादिया बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक अवशेषों से नालो जैसी हालात में परिवर्तित हो गई हैं वहाँ हम खुद भी अपनी पूजनीय मूर्तियों को ऐसी गन्दी नदियों में विसर्जन नही करना चाहेंगे यह सुझाव मेरे व्हाट्सएप ग्रुप में आया है यह एक योग्य विकल्प हो सकता हैं कृपया अपनी राय अवश्य दे।
एक विनम्र निवेदन:-
दीपावली पर लगभग हर घर में श्री गणेश और लक्ष्मी जी की नई मूर्तियों की पूजा हुई होगी. लेकिन,पुरानी मूर्ति का क्या किया होगा..?
कुछ लोग शायद इसे प्रवाहित कर देंगे और कुछ लोग.. पेड़ के नीचे रख देंगे..??
विनम्र निवेदन उन कुछ लोगों से जो इन मूर्तियो की जिसकी साल भर पूजा की..अपने लिए बहुत कुछ माँगा भी होगा अब उन्हें ऐसे ही किसी पेड़ के नीचे रख देंगे .(यह उसी तरह होगा जैसे माँ बाप जब बुड्ढे हो जाते हैं तब उन्हें आश्रम भेज दिया जाए) ऐसा न करें।
ऐसा कदापि न करें । बल्कि,एक टब पानी में थोड़ा गंगाजल डाल कर मूर्ति को उसमें रख दें।
एक-दो दिन में मूर्ति स्वतः उस में घुल जायेगी। मूर्ति घुले जल को किसी गमले या पेड़ की जड़ में डाल सकते हैं ।
आपका यह प्रयास मूर्ति का सम्मानजनक विसर्जन तो होगा ही.. नदियों को स्वच्छ रखने को उठाया गया सार्थक पहला कदम भी होगा..! लोग हमारे धर्म का मजाक भी नही बनायेगे आपने देखा होगा अन्य धर्म के लोग हम हिंदुओ के देवी देवताओं की यहाँ वहाँ मूर्तियों पड़ी होने पर फब्तियां कसते है। यह मेरा अपना द्रष्टिकोण है, आपका मत इससे अलग भी हो सकता है...
परन्तु
सहयोग की अपेक्षा के साथ!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
माँ गंगे की महिमा आपार हैं, गंगा जल से यह कार्य पूर्ण स्वच्छता एवं कम जल प्रदूषण के ही संभव होगा मैं जिन मूर्तियों को ईश्वर मान कर पूरे वर्ष तन मन धन से नतमस्तक होता हूँ मैं तो पूर्णतयः इस सुझाव के पक्ष में हूँ और आप......

































